Tuesday, December 31, 2013

New year Song

Sote sote uth jao yaaro,
mere ghar aa jao yaaro,
milkar gale haath milakar,
mujhko tum wish kar jao yaaro,
khane peene ka bhi hain intzaam,
party yahi mana jaao yaaro,

kyuki party whole Day&Night........
party whole day&night.....

aaj to sara din party aise hi chalegi,
lagakar DJ hum to khub naachenge,
or sabko yahi hum naachayenge,
hum kahi bhi nahi jayenge.

kyuki party whole Day&Night........
party whole day&night.....

sun lo ab tum meri baat, 12 baj gaye hain
sone walo uth jao, party suru ho gayi hain
naya saal main ab to, hum bhi chale gaye hain
masti or dhamaal ke saath, enter kar gaye hain

phir se naye saal main, naye naye resolution banayenge,
thode pure karenge, phr baaki bhul jayenge,
beete gumo ko bhula kar, nayi khushiyan maana,
naya kuch kar jayenge, aur naya kirtimaan banayenge,

Sab ke saath party yuhi hum manayenge
aaj sara din hum to enjoy karenge
kyuki party whole Day&Night........
party whole day&night.....

Naye saal main kuch naya kar jayenge,
is duniya main bhi apna naam kar jayenge,
kr yaad hamare kaam ko nahi hume bhul payenge,
nayi khushi ke saath sab new year manayenge,

Sab ke saath party yuhi manayenge
aaj sara din hum to enjoy karenge
kyuki party whole Day&Night........
party whole day&night..... 


kyuki party whole Day&Night........
party whole day&night.....


kyuki party whole Day&Night........
party whole day&night.....



Welcome to new year...........................

Tuesday, November 19, 2013

Freedom lyrics (My First Song)

yu hi mera naam na lena,
mujhko yu pareshan na karna,
mil jau mai kahi bhi tujhko,
to mujhko yu badnaam na karna......
 
ab meri ek gal sun le aaja,
apne dil ka hu main raja,
agar mujhse panga legi to,
baja dunga tera band baaza.....

are hogi tu koi hoor pari,
per mere aage tu na teeki,
jalwa tera dekh chuka hu,
ab to tujhko chodh chuka hu.......

mere raste pe na aana,
mujhse tu yu na takrana,
tera rasta chodh chuka hu,
ab main tujhko bhul chika hu.....

ab to yu hi azad rahunga,
kudhiyo ke saath rahunga,
kal phir se koi mil jayegi,
apni life phir set ho jayegi.......

Sunday, May 6, 2012

जिम्मेदारी और समझदारी:

जिम्मेदारी:
जो लोग अपनी जिम्मेदारी को अपनी समझदारी से पूरा करते है वो लोग सफल जरूर होते है.

समझदारी:
जो लोग अपनी समझदारी से अपनी जिम्मेदारी को दूसरों के उपर डालते हैं, वो आगे तो बढ़ते है, मगर ज्यादा सफल नहीं होते है.

ज़िम्मेदारी:
जो लोग दूसरो के काम को अपना काम समझकर उसे पूरा करते है,  वो लोग अपनी ज़िम्मेदारी से कभी पीछे नही रहते हैं।

समझदारी:
जो लोग अपने काम को खुद पूरा करने के बजाये दूसरो से करवाते हैं, वो लोग बस अपनी समझदारी मे ही रह जाते हैं।

Wednesday, May 2, 2012

मुझे भी लेते चलो

कुछ दिनों पहले की बात थी, इस भीड़ भरी लाइफ से और अपने काम से मैंने कुछ दिन अलग रहने का फैसला किया. मैं कुछ दिनों छुट्टी पर चला गया. मंजिल का पता ही नही था बस खुद पे भरोसा करके चलता चला गया, देखना चाहता था की मंजिल मुझे कहा तक ले जाती है.
                  मेरे साथ कोई भी नहीं था, बस मैं और मेरी तन्हाई. अपनी इन्हीं तन्हाइयो के साहारे मैं चलता चला गया, और अपनी मंजिल को ढूंढता रहा. काफी दूर बस से चलने के बाद मैंने कहीं रुकने का फैसला किया, कहीं किसी छोटे से शहर मे बस रुकी तो मैंने भी वही रुकने का फैसला किया. मैं बस से उतर गया और चलने लगा. थोड़ी दूर चलने के बाद मैंने किसी से यहाँ रुकने के लिए होटल के बारे मे पूछा, उसने थोडा आगे चल कर जाने के लिए बोला और ये भी बताया कि यहाँ इससे अच्छा होटल नही मिलेगा.
                 मैं वहां गया और मैंने उस होटल वाले से बात की. मैंने उसे बताया कि मैं यहाँ १०-१५ दिन के लिए आया हूँ, तब तक मुझे रहने के लिए कमरा किराये पर चाहिए. वो एक छोटे से शहर में होने और अच्छा होने के कारण उसने उसका किराया ३०० रूपए / दिन का बताया, मेरे पास और कोई बिकल्प नहीं था इसीलिए मैंने उसे ही लेना उचित समझा.
                 उसने मुझे पहले ही रूम के बारे मैं बता दिया था, और ये भी बताया था कि आपका रूम बहुत हवादार हैं. उसमे आपको कोई परेशानी नहीं होगी. मैंने उससे ज्यादा बात न करते हुए रूम कि चाभी ली और रूम में चला गया. जैसे ही मैंने रूम को खोला और उसके अंदर जाने के लिए कदम बढाया, उसमें जो मुझे अनुभव हुआ उसके बारे में आपको क्या बताऊँ इतना अच्छा रूम था कि मन कर रहा था कि बस वही रुक जाऊ, रूम के ठीक सामने खिड़की थी और वहां से ठंडी हवा आ रही थी. ऐसा लग रहा था कि मानो जन्नत में आ गए हो
               रूम के अन्दर जाते ही इतनी ठंडी हवा के सामने मेरी सारी थकान उतर गयी. ऐसा लग ही नहीं रहा था की मैं सफ़र करके आ रहा हूँ. सच में उसने जैसा कहा था रूम बिलकुल वैसा ही निकला. सफ़र के दौरान सहीं से न सो पाने के कारण मुझे नींद आ रही थी और वैसे भी इतनी अच्छी हवा के सामने कौन नहीं सोना चाहेंगा, मैंने भी ऐसा ही किया, पहले थोडा सा फ्रेश हुआ और फिर सो गया. यकीन मानिये इतनी अच्छी हवा चल रही थीं की पता ही नहीं चला की कब नींद आ गयी. मैंने सोने से पहले जब टाइम देखा था तब दोपहर के एक बज रहा था और जब आँख खुली तब सुबह के पांच बज रहे थे. वो पूरा दिन में बिना कुछ खाए ऐसे ही सोता रहा. सुबह जब उठा तब मुझे बहुत भूख लग रही थी लेकिन इतनी ठंडी हवा के सामनें मेरा उठने का मन नहीं कर रहा था. थोड़ी देर बाद में मैं उठा और फ्रेश होकर सुबह का आनंद लेने चला गया.
              मैं बस सुबह का आनंद ले ही रहा था कि कुछ दूर चलने के बाद मुझे अचानक कोई महक सी अपने पास आती हुई लगी. मैंने उस महक की तरफ जाना उचित समझा, क्योंकि मुझे भूख भी बहुत लग रही थी. मुझे लग रहा था की वह कोई ज़रूर स्वादिस्ट चीज़ होगी. मैं जैसे ही आगे बड़ा वो महक और बढ गयी. थोडा और आगे चलने के बाद मुझे एक शॉप दिखाई दी, जो मीठे की शॉप थी. मैं वह पंहुचा तो मैंने देखा कि वहां गरमा गर्म जलेबी बन रही हैं. मैंने देर न करते हुए जलेबी को खाना ही उचित समझा, क्योकि मुझे भूख बहुत लग रही थी. मैंने उससे २००ग्राम  जलेबी ली. जैसे ही मैंने जलेबी खाई, वो बहुत ही स्वादिस्ट थी. उससे खा के ऐसा लगा कि जैसे मुह मैं रस भर गया हैं. मैंने उस दुकानदार से कहा कि तुम्हारी जलेबी बहुत ही अच्छी हैं उसे खा के तो मज़ा आ गया.
              वो बोला कि हमारी जलेबी में आपको स्वाद मिलेगा और आपकी तबियत भी खुश हो गयी होगी. मैंने उससे कहा कि भाई बहुत मज़ा आ गया तुम्हारी जलेबी खाकर, ये इतनी अच्छी हैं कि क्या बताऊँ इसके बारे में. उसके बाद मैंने उससे थोड़ी बाते की और इस शहर के बारे में कुछ जानना चाहा. उसने बताया की यहाँ बहुत शांति रही हैं यहाँ आपको बड़े शहर की तरह शोर शराबा नहीं मिलेगा, यहाँ के लोग अपनों की नहीं बल्कि दुसरो की भी मदद करते हैं, आप यहाँ कुछ दिनों के लिए आये ज़रूर हो लेकिन यहाँ से जाने के बाद इस शहर को जरूर याद करोगे. उसने कुछ जगह बताई जो घुमने के लिए बहुत अच्छी हैं. उसने कहा आप एक बार जायेगा ज़रूर. कुछ देर बात करने के बाद मैंने वह से चलने का सोचा. और मैं अपने रूम पर आ गया.
             जैसे ही मैं रूम पे आया वैसे ही मेरे रूम में वेटर कुछ खाने के लिए लेकर आ गया. मैंने उससे पूछा ये क्या हैं, तो उसने बताया की सर ये हमारे होटल की तरफ से हैं. हम अपने हर कस्टमर को सुबह चाय और बिस्कुट खाने के लिए देते हैं. ये हमारे होटल की तरफ से हैं. इतना कह कर वो चला गया. मैंने चाय बिस्कुट का नाश्ता भी कर लिया और नहाने के लिए चला गया. उअके बाद जब मैंने टाइम देखा तब ११ बज चुके थे. उसके बाद मैंने घुमने के लिए निकल गया था. जैसा उस जलेबी वाले ने मुझे बताया था. उस दिन मैंने तीन चार जगह गया और लोगो से भी बाते की. लोगो से उनके शहर के बारे में जाना लेकिन पता नहीं क्यों मैंने जिससे भी पूछा सबने एक ही बताया किसी ने कुछ नया नहीं बताया. उसके बाद मैंने रात का खाना खाया और उसके बाद में अपने रूम पे आ गया. पूरा दिन घुमने के बाद थकान की वजह से में जल्दी ही हो गया था.
              अगले दिन सुबह जब मैं उठा तब मैं फिर से टहलने चला गया और उसी जलेबी वाले की दुकान पर पहुँच गया, उसकी जलेबी इतनी अच्छी लगी कि रोज़ सुबह मैंने उसकी जलेबी खाने के बारे में सोचा. मैंने सोचा कि जब तक यहाँ पर हूँ  तब तक तो उसकी जलेबी खा ही सकता हूँ. मुझे देखते ही उसने मुझसे कहा कि बाबू जी कैसे हो. मैंने कहा कि बहुत अच्छा हूँ, तुम्हारी जलेबी कि महक मुझे यहाँ तक खीच के ले आई हैं. उसने बोला साहब ये मीठी चीज ही ऐसी हैं कि एक बार मन को छु जाये तो अपने आप बुला लेती हैं और में अपने मुहं से अपनी तारीफ़ क्या करूँ. जो तो आप के यहाँ आने से पता ही चल गया हैं, इतना कह कर उसने मुझे जलेबी दे दी. मैंने जलेबी खायी और उससे बाते की, उसने मुझे यहाँ के बारे में काफी कुछ बता दिया और बोला साहब आप जब तक यहाँ हो मुझे ज़रूर याद करोगे. मैंने कहा की ऐसी बात नहीं हैं में यहाँ से जाने के बाद भी तुम्हे याद रखूँगा और तुम्हारी जलेबी के बारे में सब को बताऊंगा. इतना कह कर मैं वह से चला गया. और अपने रूम पे चला गया.
             रूम पे जाने के थोड़ी देर के बाद मेरे होटल का चाय और नाश्ता भी आ गया. वहां सुबह की ठंडी हवा मानो मुझसे कुछ कह रही हो, या वहां पे किसी के होने का एहसास करा रही हो. उस ठंडी हवा के साथ मैंने सुबह की चाय का मज़ा लिया और उसके बाद फ्रेश होकर थोड़ी देर के बाद फिर से अपने सफ़र पे निकल गया. उस जलेबी वाले से जो बात की थीं उसी को याद मैं रख कर आगे चलता चला गया. जो जो उसने बताया था मैं हर उस जगह पर गया. वह के नज़ारे इतने अच्छे थें कि वह घुमने का अलग ही मज़ा आ रहा था. सुबह से कब शाम हो गयी पता ही नही चला. थोडा थका होने के कारण मैं एक पार्क मैं जाकर बैठ गया.
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Wednesday, April 25, 2012

साड़ी और नारी

साड़ी है कि नारी है, कि नारी है कि साड़ी है.
साड़ी बिच नारी है, नारी बिच साड़ी है.
साड़ी है और नारी है, नारी है और साड़ी है.
साड़ी संग नारी है, नारी संग साड़ी है.

देख एक साड़ी को, हर नारी ये कहती हैं,
ये साड़ी मेरी है, ये मेरी साड़ी है,
देख हर नारी को, साड़ी यही कहती है,
जो मुझे पहन ले, उसी की मैं साड़ी हूँ.

Friday, April 20, 2012

छोटी की आस

पानी की एक बूंद जो मिल जाये तो,
प्यासे की किस्मत चमक जाती हैं.
प्यार की एक झलक जो मिल जाये तो,
प्यार करने वालो की जिंदगी बदल जाती हैं.

Tuesday, April 10, 2012

एक छोटी सी लव स्टोरी


एक मुर्गी को एक कौआ से प्यार हो गया,



जब मुर्गे को पता चला तो वो मुर्गी के पास गया,



और बोला.........
कि मुझमें ऐसी क्या कमी है, जो तुम उस कौआ से प्यार कर बैठी.



मैं स्मार्ट हूँ , खुबसूरत हूँ  और तुम्हारी बिरादारी का भी हूँ,
फिर भी तुम मुझे छोड़ कर उस कौआ से प्यार कर बैठी.



मुर्गी:- मैं तुम्हारे जज्बातों कि कदर करती हूँ, लेकिन मैं क्या करू मै मजबूर हूँ.



मुर्गा:- ऐसी क्या मजबूरी थी कि तुम मुझे छोड़ कर उस कौआ के पास चली गयी.


मुर्गी:- क्योंकि वो एयर फ़ोर्स मैं है.

Wednesday, February 29, 2012

CB Series at Hobart - India Vs Sri Lanka



घूम घूम बल्ला घुमाया, धूम धूम क्रिकेट दिखाया
रोमांच के इस खेल में, एक और नया रोमांच जगाया,

जहा नहीं थी कोई आस जितने की, वहा जीत ही नहीं बल्कि बोनस अंक भी दिलाया,
क्रिकेट के इन महावीरो ने, एक नया इतिहास रचाया,

क्रिकेट के इन वीरो में जहा, सहवाग, सचिन, गंभीर, विराट और रैना ने
न केवल टीम को जीत दिलाई, बल्कि इंडियन फैन के दिलो में एक नयी उम्मीद जगाई.

लंका के ३२१ रनों के जबाब में, भारतीय बल्लेवाजो में जहा,
सहवाग और सचिन ने एक धमाकेदार स्टार्ट दिया,

वही गंभीर ने भी गंभीरता से खेल को आगे बढाया, और उनका साथ देने आये विराट ने,
न केवल विराट पारी खेल कर शतक लगाया, बल्कि रैना के साथ मिलकर टीम को भी जिताया.



Incredible India Team, Incredible Cricket, Incredible Win

Thursday, February 23, 2012

Thinking of girls before and after 2011

२०११ से पहले लडकियों की सोच
हम भारतीय नारी है, अबला बेचारी है.

२०११ के बाद लडकियों की सोच
हम भारतीय नारी है, सब पर भारी है.

Sunday, February 19, 2012

प्यार या ज़िन्दगी

प्यार में मिलना ज़रूरी नहीं, प्यार में इज़हार भी ज़रूरी नहीं,
ज़रूरी सिर्फ एहसास है जिंदगी सवारने का, उन्हें पाना या न पाना ज़रूरी नहीं.

कल तक उनके साथ चलते चलते, जो राहे हरी भरी सी लगती थी,
आज उनसे अलग होने के बाद, वो भी सूखे पत्ते की तरह हो गयी है.

एक दिन उन्होंने खुद ही कह दिया, कि उन्हें हमसे प्यार है,
आज हम उनके प्या र मे, अपनी जिंदगी को खोज रहे है.